प्राथमिक चिकित्सा के उद्देश्य तथा नियम

प्राथमिक चिकित्सा उपचार तीन उद्देश्यों तथा चार नियमों पर आधारित होता है।

तीन उद्देश्य हैं :
1. जीवन को बचाना।
2. कष्टों का रोकथाम।
3. विनाशक स्थिति से बचाना।

चार नियम हैं :
1. भयभीत मत होईये।
2. हवा आने दें
3. रक्त स्त्राव को निंयत्रित करें।
4. यथा शीघ्र पशु चिकित्सक से सम्पर्क करें।
किसी आपात मामले के साथ निपटते समय इन नियमों को कभी मत भूलें। आवाज, प्रकाश तथा कम्पन के कारण व्यावधान उत्पन्न न होने दें। बिस्तर की चुभन को रोकने के लिए नम्र बिस्तर अथवा गद्दा सुलभ कराएं।
इन तीन कदमों में से एक कदम के रूप में आपात स्थिति को वर्गीकृत किया जा सकता है :
1. आपात स्थिति जब जीवन संकट में हो तो तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
2. आपात स्थिति की मांग होती तत्काल कार्रवाई करना है, संकट में डालना नहीं।
3. छोटी आपात स्थितियां।

घायल पशु तक पहुंचना :
आपात स्थिति में प्रविष्ट होने वाले पशु को इन दो समूहों (अर्थात्‌ अत्यंत गंभीर अवस्था वाले) में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1. चलने में समर्थ : इन दो प्रकार के जीवों अथवा पशुओं को चलने दिया जाए और इसके लिये उन्हें थोड़ा पुचकारा जाए और परिवहन वाहन की ओर ले जाया जाए।

2. चलने में असमर्थ :
इन पशुओं को गत्तों तथा टोकरी की आवश्यकता होती है, ये मजबूत तथा हवादार होनी चाहियें। घायल जीव को उठाकर वाहन के पास ले जाया जाए। जब प्राथमिक उपचार करने वाला चिकित्सक जीव को मूर्च्छित अवस्था में देखता है तो उसे सर्वप्रथम यह पता होना चाहिए कि क्या यह जीवित है अथवा जीवित नहीं है।

1. नब्ज देखें।
2. सांस की स्थिति को नोट करें।
3. आंखों में देखें। पता लगाएं कि उसकी आंखों में चमक है या वे स्थिर हो चुकी हैं।
4. घाव के लक्षणों का पता लगाने के लिए सिर की जांच करें और रंगत, ठण्डायन, झाग तथा सुस्ती की जांच के लिये मुंह का निरीक्षण करें।
5. उसके अंगों का निरीक्षण करें, आघात पहुंचने की स्थिति में वह ढीले पड़ जाएंगे और दौरा पड़ने की स्थिति में वे हिलने लगने लगेंगे और कुछ विशेष प्रकार के विष के भीतर चले जाने के कारण वे कठोर हो जाएंगे। दिल की धड़कन नहीं होने, सांस नहीं चलने, शरीर के ठण्डा पड़ने, आंखों के कठोर तथा स्थिर हो जाने की स्थिति में उनका मृत्यु हो जाना माना जाएगा।
निम्नलिखित विशेष स्थितियों में प्रथम उपचार की आवश्यकता होती है -
क. रक्त स्त्राव
ख. जल लाना अथवा शल्की (स्केलड)
ग. नाक से खून बहना
घ. गर्मी (अथवा लू ) लग जाना
ड़. ततैया अथवा मक्खी का डंक मारना
च. सांप का डसना
छ. हड्डी टूट जाना
ज. घाव होना
झ. दम घुटना
ञ. डूब जाना
ट. बिजली का करंट लगना
ठ. विष का प्रभाव
ड. सड़क दुर्घटना
 

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