Be Veg. Go Green.
Save the Planet
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दया नहीं तो फिर क्या है ?
धर्म - कर्म सब मिथ्या है!
जिह्वा मेरे पास नहीं, अपनी व्यथा सुनाने को।
आँसू के सिवा नहीं कुछ है, पत्थर दिल पिंघलाने को॥
निर्दोषों का खून बहाना, मानवता का मान नहीं है!
हिन्दू - मुस्लिम ! याद तुम्हें क्या, गीता और कुरान
नहीं है ?
 |
ऋषि मनियों की धरती इस भारत भूमि में प्रथम किरण के
साथ ही करोड़ों की संख्या में बटेर -
टर्की, भेड़ - बकरी, सूअर - बिल्ली, गाय - बैल, घोड़े -
कुत्ते, बन्दर - हिरण, मछली - कछुए, यहां तक कि साँप,
अजगर और मगरमच्छ जैसे जानवर भी कसाई कि छुरी की भेंट
चढ़कर खाने प्लेट में सजा दिए जाते हैं।
जरा सोचिए ! पशु, पक्षी और जल - जन्तु क्या केवल कुछ
ग्राम प्रोटिन, फैट, कार्बोहाइड्ेटस, मिनरल, विटामिन
या जीभ का क्षणिक चटोरापन ही हैं ? नहीं, कभी नहीं।
उनमें भी साँसों की धड़कन है, जीवन -वीणा के तारों का
संपदन है और परमपिता परमात्मा की दिव्य चेतना का संचरण
है। उनका अपना संसार है, अपना परिवार है, वे भी इस धरती
के बराबर के भागीदार हैं।
यदि आदमी पशु - पक्षियों को भेजन और संरक्षण देता है,
तो वे इस बदले में दूध देते हैं, खेती करते हैं, भार
ढ़ोते हैं, खाद देते हैं, ऊन देते हैं, पौधों का फलीकरण
करते हें, अनेकविध मनोरंजन करते हैं और मरे बाद भी
हड्डी और
चमड़ा प्रदान करते हैं। "गौ हमारी माता है, बैल हमारा
बाप है'' यह उक्ति भी यही बताती है कि परिवार का आधार
भी पशु है और व्यापार का आधार भी पशु ही है।
फिर जब हमें जीने का हक है, तो उनको क्यों नहीं ?
मनुज प्रकृति से शाकाहारी, मांस उसे अनुकूल नहीं है।
पशु भी मानव - जैसा प्राणी, वह मेवा - फल - फूल नहीं
है।
सब छोड़ के जाना है, क्यों पाप कमाते हो!
पानी पीते हो ? हाँ, पूर्णतः बैक्टीरिया-रहित, मिनरल
वाटर !
और मांस खाते हो ? हाँ ।
कितना घिनौना। प्रदूषित। रोगों का हवाई अड्डा ।
जी हाँ, मांस ऐसे ही तैयार होता है।
कत्लखानों का वातावरण बड़ा गन्दा और डरावना होता है।
जिधर देखो, उधर ही खून और मल-मूत्र की दलदल तथा
मांस, हड्डी, खुर, सींग, आँतें, कटे सिर व खून में
लथपथ बालों के ढेर।
आंकड़े बोलते हैं
भारतवर्ष में प्रतिदिन कटने वाले पशु -
4 लाख
भारतवर्ष में प्रतिदिन कटने वाले पक्षी -
40 लाख
अर्थात् हर मिनट में - 275 पशु और
6250 पक्षी
आजादी से पूर्व भारत में कत्लखाने -
360
आजादी के बाद आधुनिक भारत में कत्लखाने -
40000 से ऊपर
|
वाह री तरक्की। छीः छीः ॥
आज अहिंसा की धरा पर, हिंसा का तांडव छा गया।
प्रभु ऋषभ के बैल को, शिव जी के नन्दी को, कृष्ण की
गायों को
कत्लखाना खा गया। |
क्या आप जानते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन
(W.H.O.)
ने कत्लखानों में मारे जाने वाले पशुओं में कफ,
न्यूमोनिया, कैंसर, अल्सर, टी.बी., पेचिश, जोड़ दर्द,
दमा, हृदय की क्लोटिंग आदि 160 रोगों का पता लगाया है
?
शरीर विज्ञान की दृष्टि से मांसाहारी और शाकाहारी जीवों
की संरचना में मूलभूत अन्तर है, जरा देखें
|
मांसाहारी
|
शाकाहारी |
| 1. |
दांत नुकीले तथा पंजे व नाखून तेज होते
हैं। |
1. |
दांत और नाखून चपटे होते हैं। |
| 2. |
जबड़े सिर्फ ऊपर, नीचे हिलते
हैं। |
2. |
जबड़े ऊपर, नीचे,
दाएँ, बाएँ हिलते हैं। |
| 3. |
भोजन निगलते हैं। |
3. |
भोजन चबाकर खाते हैं। |
| 4. |
जीभ से चप चप कर पानी पीते
हैं। |
4. |
ओठों से पानी
पीते हैं। |
| 5. |
पेटों में आंतों की लंबाई छोटी होती
है। |
5. |
आंतों
की लंबाई शरीर से तीन गुणा लंबी होती है। |
| 6. |
जिगर व गुर्दे बड़े होते हैं। |
6. |
जिगर व गुर्दे छोटे
होते हैं। |
| 7. |
लार में हाइड्रोक्लोरिक एसिड अधिक होता
है। |
7. |
लार
क्षारीय होती है। |
| 8. |
पसीना नहीं आता। |
8. |
पसीना आता है। |
मनुष्य शाकाहारी वर्ग का सदस्य है, मांस उसका
प्राकृतिक भोजन नहीं है।
मांस स्वयं में जैव पदार्थ है और अन्य करोड़ों जैव
पदार्थों-जीवाणु, विषाणु और परजीवी का घर है।
साल्मोनैला, कैम्पिलोबैक्टर, क्लोस्ट्रिडियम -
बोटुलिनियम (भोजन को विषाक्त बनाने वाला), यरसीनिया-
एन्ट्रो कोलोटिका (पेट में सूजन कर्त्ता), इ.कोलाइ
(मूत्रमार्ग में सन्दूषण - कर्त्ता) लिस्टीरिया (फोड़े
फुंसी करने वाला) जीवाणु मांस के प्रमुख मेहमान हैं।
प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि पाँच - पाँच घण्टे तक
पानी में उबालने पर भी ये नष्ट नहीं होते, क्योंकि
मांस जलावरोधी ओर तापावरोधी होता है।
ब्रिटिश मैडिकल एसोसिएशन ने मांसाहार से उच्च रक्तचाप,
हृदय - रोग, मोटापा, बड़ी आंत के रोग, मधुमेह, कैंसर,
अस्थिक्षय, एन्जाइना, गठियाबाय, गुर्दे की पत्थरी,
अपैण्डिसाइटिस, पौष्टिक अल्सर, एथरोक्लैरोरिस, भोजन
विषाक्तता, एसिडिटी, कब्ज, मनोरोग जैसी बीमारियों का
होना सिद्ध किया है। सीधा - सपाट निष्कर्ष है :
अधिक मांसाहार : संक्षिप्त जीवन =
Heavy Flesh-eating : Shorter Life-expectancy
सण्डे हो या मण्डे, कभी न खाओ अण्डे!
सम्पूर्ण अण्डा - उद्योग बेजुबान मुर्गियों पर अन्तहीन
क्रूरता और अत्याचार के आधार पर टिका है। एक दिन के
चूजों को निरन्तर उच्च प्रोटिन - युक्त आहार
(Meat, meal, bone meal, fish
meal, सोयाबीन,
मक्का आदि) खिलाकर शीघ्र जवान बनाया जाता है। फिर
उन्हें भीड़ - भरे, बदबूदार, जालीदार फर्श वाले
मुर्गीखानों में, मालगोदाम की तरह ठूंस - ठूंस कर रखा
जाता हैं (20x20 इंच लम्बे-चौड़े पिंजरों में चार या
पांच मुर्गी)। ऐसी दर्दनाक स्थिति में दिन रात रहने से
मुर्गियाँ पागल होकर चीखती हैं, चिल्लाती हैं, पंख
नोचती हैं और एक दूसरे को मार डालने व कच्चा ही खा
डालने की कोशिश करती हैं। इस परिस्थिति में निबटने के
लिए फैक्ट्री वाले लोहे के गर्म ब्लेड से उनकी चोंच
काट देते हैं। घोर हताशा में जब वे पंजों से लड़ती हैं
तो उनके पंजे भी काट दिए जाते हैं।
वजन बढ़ाने व अधिक अण्डे देने के लिए मुर्गीदाने में
शुरू से आखिर तक सल्फा दवाओं, आर्सैनिक कम्पाउण्ड,
हार्मोनवर्धक व न्यूट्रोफुरान दवाओं तथा एण्टीबाइटिक
दवाओं का भरपूर प्रयोग किया जाता है। एक मुर्गी की
पूर्ण आयु 10 से
12 वर्ष तक होती है। पर
6 मास के
होते-होते वह अण्डा देने लगती है, डेढ़ साल तक वह अण्डे
देती है, फिर दो वर्ष की होने पर उसे कटने के लिए
होटलों और कत्लखानों में सप्लाई कर दिया जाता है।
कई भोले-भाले लोग अण्डे को शाकाहारी, मशीनी, निर्जिव
या 'राम लड्डू' कहते हैं, पर तथ्य ये नहीं है। शाकाहार
वह है, जो पेड़-पौधों के ऊपर लगे। पर अण्डा तो मुर्गी
के योनिमार्ग से पैदा होता है। वह उसका तरल गर्भ है,
गर्भ-रस है और अपरिपक्व भ्रूण है। मुर्गी अण्डाश्य से
निकली जीवित कोशिका बढ़कर अण्डा बनती है। इसके खोल में
25 से
30 हजार तक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनसे यह
ऑक्सीजन लेता है और कार्बनडाइआक्साइड छोड़ता है।
300 ऊपर तापमान में रखे जाने पर यह सड़ने लगता है। प्रत्येक
सौ ग्राम अण्डा खाने से खून में
450 से 500 mg. तक
कोलैस्ट्रोल की वृद्धि होती है, जिससे हृदय-रोग, उच्च
रक्तचाप एग्जिमा, एलर्जी, कब्ज, पेचिश, आँतों की सड़न,
एसिडिटी जैसी बीमारियाँ जन्म लेती हैं। क्या अण्डा
खाने से पहले आपने कभी इन बातों के बारे में सोचा हैं
?
स्वस्थ सुन्दर सात्विक जीवन का आधार : शाकाहार
आप पढ़ चुके हैं (और साक्षात् अनुभाव भी कर चुके हैं)
कि मनुष्य शाकाहारी प्राणिवर्ग का सदस्य है। शाकाहार
इसका प्राकृतिक भोजन है। शाकाहार में भोजन के सभी
आवश्यक तत्त्व - प्रोटिन, फैट, कार्बोहाईड्रेटस, खनिज
एवं विटामिन परिपूर्ण एवं सन्तुलित मात्रा में प्राप्त
होते हैं। जरा देखिए तुलनात्मक तालिका :
(मानक - प्रति सौ ग्राम में कुल ग्राम)
| पदार्थ का नाम
|
प्रोटिन |
कार्बाहाइड्रेटस |
वसा |
खनिज |
कैलोरी |
|
शाकाहारी पदार्थ |
| गेहूं (आटा) |
12.1 |
69.4 |
1.7 |
2.7 |
361 |
| मक्का |
11.1 |
66.2 |
3.6 |
1.5 |
342 |
| साबुत चना |
17.1 |
60.9 |
5.3 |
3.0 |
360 |
| चावल |
13.5 |
48.4 |
16.2 |
6.6 |
393 |
| सोयाबीन |
43.2 |
20.9 |
19.5 |
4.6 |
432 |
| मूंग |
24.0 |
56.7 |
1.3 |
3.5 |
334 |
| मूंगफली |
26.7 |
26.7 |
39.8 |
2.5 |
315 |
| बादाम |
20.8 |
10.5 |
58.9 |
2.9 |
655 |
| काजू |
21.2 |
22.3 |
46.9 |
2.4 |
596 |
| खजूर |
2.5 |
75.8 |
0.4 |
2.1 |
317 |
| पनीर |
24.1 |
6.3 |
25.1 |
4.2 |
348 |
| सप्रेटा दूध |
38.0 |
51.0 |
0.1 |
6.8 |
357 |
| घी |
- |
- |
100 |
- |
900 |
| शहद |
0.3 |
79.5 |
- |
.2 |
319 |
|
मांसाहारी पदार्थ |
| अण्डा |
13.3 |
- |
13.3 |
1.0 |
173 |
| सुअर का मांस |
18.7 |
- |
4.4 |
1.8 |
114 |
| बकरे का मांस |
21.4 |
- |
3.6 |
1.1 |
188 |
| गाय का मांस |
22.6 |
- |
2.6 |
1.0 |
114 |
| भेड़ का मांस |
18.5 |
- |
13.3 |
1.3 |
194 |
| मछली |
9.0 से
76.0 |
0 से 13.9 |
19.4 |
27.5 |
413 |
अधिकांश पोषण- विज्ञानियों के अनुसार मनुष्य को अपनी
कुल दैनिक कैलोरी का 60 प्रतिशत भाग कार्बोहाइड्रेटस
से, 20 प्रतिशत वसा से और
5-6 प्रतिशत प्रोटिन द्वारा
ग्रहण करना चाहिए। शाकाहारी पदार्थों में
कार्बोहाइड्रेटस प्रचुर परिमाण में उपलब्ध हैं, जबकि
मांसाहारी पदार्थों में इनका सर्वथा अभाव है।
ऊर्जा-प्रवाह के सिद्धान्त अनुसार वनस्पति- पदार्थों
में मांसाहार से दस गुणी ऊर्जा निहित है। इसीलिए
दुनिया के सबसे अधिक तेज दौड़ने वाले, कड़ी मेहनत करने
वाले, भारी भरकम शरीर वाले तथा ऊँची कद काठी वाले
जानवर- हाथी, घोड़े, बैल, ऊँट, जिराफ, बारहसिंहा व
व्हेल मछली पूर्णतः शाकाहारी ही हैं। किसी ने ठीक ही
कहा है - सुन्दर स्वस्थ निरोगी कायाः शाकाहार की
अदभुत् माया॥
मजहब नहीं सिखाता आपस में वैर करना
विश्व के सभी धर्मग्रन्थों और धर्मगुरूओं ने
प्राणिमात्र के प्रति करूणा भावना रखने और किसी की
हत्या न करने का उपदेश दिया है। दुष्काल के प्रभाव से
कुछ परम्पराओं में मांसाहार की प्रवृत्ति भी पनपी, पर
सभी की मूलभावना तो अहिंसा और दया की ही रही है, यथा-
1. हिन्दू धर्म : हिन्दु धर्मशास्त्रों ने सभी जीवों
को ईश्वर 'JAIN FOOD' ये गौरवपूर्ण नाम दिया
है। 23 वें का अंश मानकर ÷मा हिंस्यात् सर्वभूतानि'-
किसी जीव की हिंसा न करो, का आदेश दिया है। स्कन्द
पुराण में लिखा है-÷जो दूसरे का मांस खकर अपना मांस
बढ़ाना चाहता ह, वह उतने दिन नरक में सड़ता है, जितने
मृत पशु के शरीर में रोम थे।' हिन्दू तीर्थकर
पार्श्वनाथ जी ने यज्ञ की लकडियों में जलते हुए धर्म
की सभी नाग-नागिन के जोड़े की रक्षा की और राजा मेघरथ
ने अपने शरीर का मांस-दान करके बाज के हाथों कबूतर की
प्राण रक्षा की, अवान्तर शाखाओं-ब्रह्मसमाज, आर्य
समाज, देवसमाज, सनातन धर्म, राधा स्वामी, सच्चा सौदा,
विश्नोई समाज आदि सबने शाकाहारी भोजन व मांस-निषेध को
सिद्धान्त के रूप में स्वीकार किया।
2. जैन धर्म : जैन धर्म की तो नींव ही अंहिसा है। सभी
तीर्थकर भगवन्तों ने जगत् के सब जीवों की रक्षा और
दया के लिद ही धर्म - देशना दी है। जैन साधु जीवरक्षा
के लिए ही जीवनभर नंगे पैर, पैदल चलते हैं, मुख पर
मुखपत्ती और कन्धे पर रजोहरण रखते हैं। प्रमुख
अन्तर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों में शुद्ध शाकाहारी भोजन
पर बल दिया है।
3. सिख धर्म : गुरू साहिबानों ने पशु- हिंसा करने का
स्पष्ट निषेध किया। आदि गुरू श्री गुरू नानक देव जी ने
मांस भक्षकों को राक्षस कहा और उनकी जीव घात की आदत
छुड़ाकर नाम-दान दिया। विश्व के किसी भी गुरूद्वारे के
लंगर में मांस- अण्डा नहीं परोसा जाता। गुरूद्वारों
में अमृत छकाते समय जीवन- भर के लिए मांस, अण्डे, व
शराब का त्याग कराया जाता है।
4. इस्लाम धर्म : इस्लाम में पशुओं के अधिकारों की
रक्षा व उनकी भलाई पर जोर दिया है। कुरान शरीफ
(22.37) में स्पष्ट लिखा है कि किसी पशु को मारने में
धर्म नहीं है। अपनी रूह को कुर्बान करो, क्योंकि मारे
गए पशु का खून और मांस खुदा तक नहीं पहुंचेगा, इन्सान
की इबादत ही वहां तक पहुँचेगी।
5. इसाई धर्म : ईसा मसीह को आत्मिक ज्ञान 'जॉन द
बैप्टिस्ट' से प्राप्त हुआ, जो मांसाहार के सख्त
विरोधी थे। ईसा के दस आदेशों में से दो प्रमुख ये हैं-
1. किसी जीव की हत्या न करो - Thou
shalt not kll 2. अपने
पड़ोसी से प्यार करो - Love thy
neighbour Gospel of peace of Jesus Christ. में ईसा मसीह ने कहा है-
÷सच तो यह है जो हत्या करता है, वह अपनी ही हत्या करता
है और जो मरे हुए जानवर का मांस खाता है, वह अपना ही
मुर्दार खा रहा है।' सेंट मैथ्यू व सेंट पाल मांसाहार
को धार्मिक पतन का
सूचक मानते थे। मैथोडिस्ट और सैवन्थ डे एडवेण्टिस्ट
नामक ईसाई - सम्प्रदाय मांस खाने व शराब पीने का
स्पष्ट निषेध करते हैं। लियो टालस्टाय और दुखोबोर (रूस
के मोमिन ईसाई) भी मांसहार को ईसाई धर्म के विपरित
मानते थे ।
विश्व में शकाहार के बढ़ते चरण
हांलाकि विश्व के काफी बड़े भूभाग में अब भी मांसहार का
प्रचलन है, फिर भी शाकाहार की गुणवत्ता और मांसहार के
दुष्परिणामों को समझने से दुनिया भर में शाकाहार का
प्रचार-प्रसार एक जन आन्दोलन का रूप लेता जा रहा है।
अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया और अधिकांश एशियाई देशों
में वैजीटेरियन सोसाइटियाँ स्थापित हो रही हैं, जिनकी
विस्तृत जानकारी
www.worldanimalnet.com पर उपलब्ध
है। PETA, SPCA, PCRM, VRG, SPEAK,
CIWF, HFA, BWC, PFA, Earth save foundation, Fund for
Animals, American Vegan Society आदि कई
हजारों संस्थाएँ पर्यावरण-सुरक्षा, शाकाहार-प्रोत्साहन
और पशु-क्रूरता-निवारण-हेतु काफी सार्थक प्रयास कर रही
है।
शाकाहार अब कोई दलितों और पिछड़ों का भोजन नहीं रहा,
विश्व के बड़े-बड़े लोग शकाहार अपनाने में गर्व महसूस
करने लगे हैं। कुछ प्रमुख ये हैं:- भारत के राष्ट्रपति
अब्दुल कलाम, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अलगोर, सर
पाल मैकार्टन, पामेला एंडरसन, माइकल जैक्सन, अमिताभ
बच्चन, जान अब्राहम, हेमा मालिनी, गायिका मैडोना, लंबी
दौड़ में 20 विश्व रिकार्डधारी नुर्मी, इंगलिश चैनल पार
करने में रिकार्डधारी मुर्रे-रोज, ट्रायथलोन में विश्व
रिकार्डधारी सिक्स्टो लिनेयर्स,
400 मीटर बाधा-दौड़ में
ओलम्पिक स्वर्णविजेता एडविन मोसेस, नौ बार की
बिम्बल्डन विजेता मार्टिना नवरातिलोवा, नौ बार के
ओलम्पिक स्वर्ण-विजेता विख्यात धावक कार्ल लुइस, स्पिन
गेंदबाज अनिल कुम्बले पूर्णतः शाकाहारी हैं। पर्यावरण
की सुरक्षा-हेतु मांसाहार त्यागिए और शुद्ध सात्विक
शाकाहार अपनाइए। प्रसिद्ध अमेरिका अभिनेता
Aleac Baldwin के शब्दों में:-
Every time we sit down to eat, we
make a choice. Please choose vegetarianism. Do it
for animals. Do it for environment and do it for
your health.
अगर आराम चाहो तो, नसीहत ये हमारी है।
किसी का मत दुखाओ दिल, सभी को जान प्यारी है॥
पेट भर सकती हैं तेरा, सिर्फ जब दो रोटियाँ।
फिर क्यूं खाता है तू बन्दे, बेजुबां की बोटियाँ॥
जीओ और जीने दो सबको, महावीर का नारा है।
चींटी से हाथी तक सबको, अपना जीवन प्यारा है॥
है भला तेरा इसी में, मांस खाना छोड़ दे।
इस मुबारक पेट में, कब्रें बनाना छोड़ दे॥ |
|
Be Veg. Go Green.
Save the Planet.
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